2014 के बाद भारत का हवाई अड्डा मानचित्र दोगुने से अधिक बढ़ा — 74 परिचालन हवाई अड्डों से 2025 तक 160 से अधिक — जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बना। 2016 में शुरू हुई उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) क्षेत्रीय संपर्क योजना ने छोटे शहरों की उड़ानों को सब्सिडी देकर और बंद हवाई पट्टियों को पुनर्जीवित करके इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
विमानन
भारत में परिचालन हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2025 में 163 हुई, और 15 जुलाई 2026 तक 165 हो गई। इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा उड़ान क्षेत्रीय-संपर्क योजना से आया, जिसने छोटे शहरों और कस्बों तक उड़ानें पहुँचाईं।

| वर्ष | परिचालन हवाई अड्डे (2014 → जुलाई 2026) |
|---|---|
| 2014 | 74 हवाई अड्डे |
| 2015 | 78 हवाई अड्डे |
| 2016 | 85 हवाई अड्डे |
| 2017 | 92 हवाई अड्डे |
| 2018 | 101 हवाई अड्डे |
| 2019 | 110 हवाई अड्डे |
| 2020 | 120 हवाई अड्डे |
| 2021 | 131 हवाई अड्डे |
| 2022 | 141 हवाई अड्डे |
| 2023 | 149 हवाई अड्डे |
| 2024 | 157 हवाई अड्डे |
| 2025 | 163 हवाई अड्डे |
| 2026 | 165 हवाई अड्डे |
यह क्यों मायने रखता है अधिक हवाई अड्डे बड़े महानगरों से परे हवाई यात्रा की पहुँच बढ़ाते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं व पर्यटन को सहारा देते हैं।
- परिचालन हवाई अड्डे: 74 (2014) → 163 (2025) → 165 (15 जुलाई 2026)
- वृद्धि मुख्यतः उड़ान क्षेत्रीय योजना से
- स्रोत: नागरिक उड्डयन मंत्रालय / एएआई




इतिहास
प्रमुख परियोजनाएँ
नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे इस विस्तार को आधार देते हैं — नोएडा (जेवर), नवी मुंबई, धोलेरा और पुरी सहित — जबकि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 ने औपनिवेशिक-कालीन 1934 के विमान अधिनियम की जगह ली। उड़ान के तहत मार्च 2026 तक 663 क्षेत्रीय मार्ग और 95 हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट व जल एयरोड्रोम चालू किए गए, जिन पर 1.5 करोड़ से अधिक यात्री यात्रा कर चुके हैं।
यह कैसे काम करता है
भारत का विमानन उछाल इस क्षेत्र को निजी एयरलाइनों व निजी हवाई अड्डा संचालकों के लिए खोलने पर टिका है, नियामक DGCA की देखरेख में। बड़े हवाई अड्डे तेज़ी से निजी कंपनियाँ लंबी सार्वजनिक-निजी रियायतों के तहत चलाती हैं (अदाणी व GMR कई चलाते हैं), जो टर्मिनल बनाती हैं और उपयोगकर्ता शुल्क से लागत वसूलती हैं। महानगरों से आगे उड़ान फैलाने हेतु, उड़ान योजना क्षेत्रीय मार्गों पर किराया सीमित करती है और एयरलाइनों को छोटे-शहर हवाई अड्डों तक उड़ने हेतु सब्सिडी देती है जो अन्यथा व्यवहार्य न होते।
आगे की राह
सरकार 2030 तक 230 हवाई अड्डों और 2047 तक 350–400 का लक्ष्य रखती है, यात्री यातायात 2030 तक सालाना लगभग 71.5 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। संशोधित उड़ान योजना (₹28,840 करोड़, 2026–2036) का लक्ष्य 120 गंतव्य और 4 करोड़ यात्री जोड़ना, मौजूदा हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डे विकसित करना, और दूरदराज़ तथा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 200 हेलिपैड वित्तपोषित करना है।
आँकड़ों में
74 → 160+ परिचालन हवाई अड्डे (2014→2025)। तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार। 600+ उड़ान क्षेत्रीय मार्ग; 1.56 करोड़ उड़ान यात्री। ~77 लाख रोज़गार समर्थित; जीडीपी का लगभग 1.5%। स्रोत: MoCA, AAI, IATA, PIB।
आँकड़े इस तिथि तक: 15 जुलाई 2026 तक
स्रोत: नागर विमानन मंत्रालय, PIB के माध्यम से — परिचालन हवाई अड्डे: 2014 में 74 और 2025 में 163 (PIB, 23 अक्टूबर 2025, लिंक); 15 जुलाई 2026 तक 165 (PIB संशोधित उड़ान बैकग्राउंडर, 17 जुलाई 2026)। · लिंक