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ऑटोमोबाइल

ऑटोमोबाइल

भारत दुनिया के सबसे बड़े वाहन निर्माताओं में से एक है। कुल वाहन उत्पादन 2014 के लगभग 1.9 करोड़ इकाइयों से बढ़कर 2024 तक 2.8 करोड़ से अधिक हुआ, दोपहिया व यात्री कारों की अगुवाई में, और यह क्षेत्र प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार देता है। SUV, निर्यात और अब EV मिश्रण को नया आकार दे रहे हैं। काउंटर कुल वाहन उत्पादन दिखाता है।

Isuzu manufacturing plant India
Isuzu manufacturing plant India · Wikimedia Commons
19 → 28 mn
वाहन उत्पादन/वर्ष
~3.5 cr+
नौकरियाँ
~48 lakh
वाहन निर्यात
Vehicles produced / year
Vehicle production
वर्षVehicle production
201419 mn
201520 mn
201621 mn
201723 mn
201825 mn
201926 mn
202023 mn
202122 mn
202226 mn
202326 mn
202428 mn
202531 mn
2014
0mn
Vehicle production
20142025
Since 2014
Added
+12 mn
2014
19 mn
2025
31 mn

यह क्यों मायने रखता है ऑटो उद्योग एक विनिर्माण व रोज़गार शक्ति और बढ़ता निर्यातक है, मेक इन इंडिया व EV संक्रमण का केंद्र।

  • वाहन उत्पादन: ~1.9 करोड़ (2014) → ~2.8 करोड़ (2024)
  • ~3.5 करोड़+ नौकरियाँ; ~48 लाख वाहन निर्यात
  • स्रोत: SIAM

इतिहास

ऑटोमोबाइल उद्योग भारत के विनिर्माण स्तंभों में से एक है। कुल वाहन उत्पादन 2014 के लगभग 1.9 करोड़ इकाइयों से बढ़कर 2024 तक 2.8 करोड़ से अधिक हुआ, दोपहिया (लगभग 70%) व तेज़ी से बढ़ते यात्री-कार खंड के प्रभुत्व में। भारत दोपहिया, तिपहिया व कारों के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में है।

प्रमुख बदलाव

मिश्रण तेज़ी से बदल रहा है: SUV अब यात्री-वाहन बिक्री का आधा हिस्सा हैं, निर्यात बढ़कर लगभग 48 लाख वाहन प्रति वर्ष हुआ, और इलेक्ट्रिक वाहन नई वृद्धि सीमा हैं, FAME व PM E-DRIVE द्वारा समर्थित। ₹25,938 करोड़ ऑटो PLI योजना व मारुति, हुंडई, टाटा, महिंद्रा व BYD जैसे नए प्रवेशकों का भारी निवेश क्षमता को वैश्विक-हब पैमाने की ओर बढ़ा रहा है।

यह कैसे काम करता है

भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाज़ार है और दो- व तीन-पहिया वाहनों का सबसे बड़ा निर्माता, घरेलू व विदेशी कार-निर्माताओं (मारुति सुज़ुकी, टाटा, महिंद्रा, हुंडई) व विशाल कल-पुर्ज़ा उद्योग के गहरे आधार पर निर्मित। राज्य इलेक्ट्रिक की ओर बदलाव को दो लीवरों से आकार देता है: सब्सिडी (FAME, अब PM E-ड्राइव योजना) जो EV की क़ीमत घटाती है, और एक PLI योजना जो उन्नत वाहन व बैटरी घर में बनाने को पुरस्कृत करती है।

आगे की राह

निर्णायक चुनौती इलेक्ट्रिक संक्रमण है — EV अब भी कार बिक्री का छोटा हिस्सा हैं पर तेज़ी से बढ़ रहे, दो-पहिया व बसों के नेतृत्व में। अगले दशक का काम है चार्जिंग को बड़े शहरों से आगे फैलाना, बैटरी-सेल विनिर्माण घर में बनाना (आज अधिकतर आयातित), और लाखों पेट्रोल-इंजन-कल-पुर्ज़ा रोज़गार को ख़तरे में डाले बिना बदलाव संभालना।

आगे का रास्ता

आगे का संतुलन EV बदलाव है — मौजूदा इंजन-कल-पुर्ज़ा रोज़गार की रक्षा करते हुए इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ना, और अधिक बैटरी सेल घर में बनाना।

आँकड़ों में

~1.9 → ~2.8 करोड़ वाहन/वर्ष (2014→2024)। ~3.5 करोड़+ नौकरियाँ। ~48 लाख निर्यात। ऑटो PLI ₹25,938 करोड़। स्रोत: SIAM, IBEF।

स्रोत: SIAM — total vehicle production (million units), 2014–2025.