रखरखाव से आधुनिकीकरण तक
दशकों तक भारतीय रेल क्रमिक रखरखाव की कहानी थी। 2014 के बाद यह बदला: पूंजीगत व्यय 2025-26 में लगभग ₹2.62 लाख करोड़ तक पहुँचा, जो एक दशक पहले के स्तर से नौ गुना से अधिक है।
सबसे उल्लेखनीय बदलाव विद्युतीकरण है। 2014 के बाद भारत ने 48,072 रूट किमी विद्युतीकृत किए — उससे पहले के सभी वर्षों के 21,801 किमी के दोगुने से अधिक — और अब ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 99.6% विद्युतीकृत है।
नई ट्रेनें, नए पुल
वंदे भारत एक्सप्रेस 2019 में शुरू हुई और 2025 के अंत तक 164 सेवाओं तक बढ़ी। साथ में ऐतिहासिक इंजीनियरिंग आई:
- चिनाब पुल — दुनिया का सबसे ऊँचा रेल आर्च, नदी से 359 मीटर ऊपर
- केबल-स्टेड अंजी खड्ड पुल, कश्मीर रेल लिंक को पूरा करते हुए
- रामेश्वरम तक पुनर्निर्मित पंबन वर्टिकल-लिफ्ट समुद्री पुल
1,300 से अधिक स्टेशन अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्निर्मित हो रहे हैं, और स्वदेशी कवच प्रणाली व्यस्त मार्गों पर लगाई जा रही है।
माल और सुरक्षा
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल माल वाहक है। दुर्घटनाएँ 2014-15 के 135 से घटकर 2025-26 में 16 रह गईं।
आगे क्या
अगला चरण समर्पित माल गलियारों (DFC) के ज़रिए माल ढुलाई में हिस्सा वापस बढ़ाना और कवच को पूरे नेटवर्क में विस्तारित करना है। स्रोत: रेल मंत्रालय, PIB।
